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बाल्यावस्था और विकास अवधारणा और सिद्धांत

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बाल्यावस्था और विकास अवधारणा और सिद्धांत

डॉ. निरुपमा दुबे

In Stock
₹650.00 ₹550.00
Category Education
Subcategory Education
Publisher Chirayu Publications
Language Hindi
Shipping ₹50.00
Publication Date 16-02-2026

बाल्यावस्था मानव जीवन की सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील अवस्था मानी जाती है, क्योंकि इसी अवधि में व्यक्ति के व्यक्तित्व, व्यवहार, बुद्धि, भावनाओं और सामाजिक दृष्टिकोण की नींव रखी जाती है। बालक का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक विकास एक सतत एवं क्रमिक प्रक्रिया है, जो गर्भावस्था से लेकर किशोरावस्था तक विभिन्न चरणों में संपन्न होती है। प्रस्तुत पुस्तक “बाल्यावस्था और विकास : अवधारणा और सिद्धांत” बाल विकास की इन जटिल प्रक्रियाओं को वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक और शैक्षिक दृष्टिकोण से स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करती है। इस पुस्तक में बाल्यावस्था की अवधारणा, उसकी विशेषताएँ तथा विकास और वृद्धि के बीच के अंतर को विस्तारपूर्वक समझाया गया है। विकास के विभिन्न आयाम—शारीरिक विकास, संज्ञानात्मक विकास, भाषा विकास, सामाजिक एवं भावनात्मक विकास तथा नैतिक और नैसर्गिक विकास—का क्रमबद्ध एवं उदाहरण सहित विश्लेषण किया गया है। साथ ही, आनुवंशिकता और पर्यावरण, परिवार, विद्यालय, समाज, संस्कृति, पोषण एवं शिक्षा जैसे कारकों की भूमिका पर विशेष प्रकाश डाला गया है। पुस्तक का एक महत्वपूर्ण भाग बाल विकास से संबंधित प्रमुख सिद्धांतों पर केंद्रित है। इसमें फ्रायड का मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत, पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत, एरिकसन का मनोसामाजिक विकास सिद्धांत, कोहलबर्ग का नैतिक विकास सिद्धांत, तथा वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत सरल भाषा और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया है। इन सिद्धांतों के शैक्षिक निहितार्थों को स्पष्ट करते हुए यह बताया गया है कि शिक्षक कक्षा में बालकों की व्यक्तिगत भिन्नताओं को समझकर किस प्रकार प्रभावी शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का संचालन कर सकते हैं। यह पुस्तक शिक्षक-प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है। बाल मनोविज्ञान की सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ इसमें व्यावहारिक दृष्टिकोण भी समाहित है, जिससे पाठक बाल-केंद्रित शिक्षा, समावेशी शिक्षा और सकारात्मक सीखने के वातावरण के निर्माण में सक्षम हो सकें। सरल, स्पष्ट और व्यवस्थित प्रस्तुति के कारण “बाल्यावस्था और विकास : अवधारणा और सिद्धांत” बाल विकास के अध्ययन हेतु एक प्रामाणिक, उपयोगी और समसामयिक संदर्भ ग्रंथ के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाती है।

बाल्यावस्था मानव जीवन की सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील अवस्था मानी जाती है, क्योंकि इसी अवधि में व्यक्ति के व्यक्तित्व, व्यवहार, बुद्धि, भावनाओं और सामाजिक दृष्टिकोण की नींव रखी जाती है। बालक का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक विकास एक सतत एवं क्रमिक प्रक्रिया है, जो गर्भावस्था से लेकर किशोरावस्था तक विभिन्न चरणों में संपन्न होती है। प्रस्तुत पुस्तक “बाल्यावस्था और विकास : अवधारणा और सिद्धांत” बाल विकास की इन जटिल प्रक्रियाओं को वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक और शैक्षिक दृष्टिकोण से स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करती है। इस पुस्तक में बाल्यावस्था की अवधारणा, उसकी विशेषताएँ तथा विकास और वृद्धि के बीच के अंतर को विस्तारपूर्वक समझाया गया है। विकास के विभिन्न आयाम—शारीरिक विकास, संज्ञानात्मक विकास, भाषा विकास, सामाजिक एवं भावनात्मक विकास तथा नैतिक और नैसर्गिक विकास—का क्रमबद्ध एवं उदाहरण सहित विश्लेषण किया गया है। साथ ही, आनुवंशिकता और पर्यावरण, परिवार, विद्यालय, समाज, संस्कृति, पोषण एवं शिक्षा जैसे कारकों की भूमिका पर विशेष प्रकाश डाला गया है। पुस्तक का एक महत्वपूर्ण भाग बाल विकास से संबंधित प्रमुख सिद्धांतों पर केंद्रित है। इसमें फ्रायड का मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत, पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत, एरिकसन का मनोसामाजिक विकास सिद्धांत, कोहलबर्ग का नैतिक विकास सिद्धांत, तथा वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत सरल भाषा और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया है। इन सिद्धांतों के शैक्षिक निहितार्थों को स्पष्ट करते हुए यह बताया गया है कि शिक्षक कक्षा में बालकों की व्यक्तिगत भिन्नताओं को समझकर किस प्रकार प्रभावी शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का संचालन कर सकते हैं। यह पुस्तक शिक्षक-प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है। बाल मनोविज्ञान की सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ इसमें व्यावहारिक दृष्टिकोण भी समाहित है, जिससे पाठक बाल-केंद्रित शिक्षा, समावेशी शिक्षा और सकारात्मक सीखने के वातावरण के निर्माण में सक्षम हो सकें। सरल, स्पष्ट और व्यवस्थित प्रस्तुति के कारण “बाल्यावस्था और विकास : अवधारणा और सिद्धांत” बाल विकास के अध्ययन हेतु एक प्रामाणिक, उपयोगी और समसामयिक संदर्भ ग्रंथ के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाती है।

Category Education
Sub-Category Education
ISBN 978-81-989046-5-1
Language Hindi
Publisher Chirayu Publications
Author Name डॉ. निरुपमा दुबे
Publication Date 16-02-2026
Shipping Charge ₹50.00