Indian Knowledge Tradition and Education
Dr. Bharat Upadhyay, Dr. Meeta Parikh, Ms. Khushnuma Mansuri
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Publication Date:2025-09-05
“भारतीय ज्ञान परंपरा और शिक्षा - एक नवदृष्टि” एक समकालीन अध्ययन है जो प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge System – IKS) की व्यापक और बहुआयामी विरासत को आधुनिक शिक्षा के संदर्भ में पुनः स्थापित करता है। यह पुस्तक न केवल ऐतिहासिक और दार्शनिक दृष्टिकोण से भारतीय ज्ञान की गहराई को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे इस प्राचीन ज्ञान को वर्तमान की शिक्षण पद्धति, कौशल विकास, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के साथ समन्वित किया जा सकता है। भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयाम जैसे कला, विज्ञान, गणित, खगोलशास्त्र, वास्तुकला, संगीत, कृषि, चिकित्सा, और आध्यात्मिकता आदि के क्षेत्र में गहन और व्यवस्थित ज्ञान का स्रोत रहे हैं। पारंपरिक शिक्षण पद्धतियाँ जैसे गुरुकुल, टोल, मठ, विहार आदि ने न केवल ज्ञान का प्रसार किया बल्कि सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों का भी संवर्धन किया। कालांतर में विदेशी आक्रमणों के कारण यह परंपराएँ कई रूपों में क्षीण होती गईं।
इस पुस्तक का उद्देश्य इस विरासत को पुनः सक्रिय करना और इसे वर्तमान शिक्षा के मानकों और सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना है। लेखकों ने भारतीय शिक्षण प्रणाली के प्रमुख घटकों, जैसे कि नैतिकता, आत्मनिर्भरता, सामूहिकता और रोजगार उन्मुख दृष्टिकोण का विवेचन करते हुए यह बताया है कि कैसे इन्हें आज की शिक्षा प्रणाली में सम्मिलित किया जा सकता है। पुस्तक में वैदिक शिक्षा, उपनिषदिक चिंतन, बौद्ध दर्शन, न्यायशास्त्र, आयुर्वेद, योग, गणित, खगोलशास्त्र, वास्तुशास्त्र, कृषि, और भारतीय कला के शिक्षण एवं अनुसंधान पर भी विशेष प्रकाश डाला गया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में भारतीय ज्ञान की समावेशिता को लेकर जो दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है, उसके अनुरूप यह पुस्तक उच्च शिक्षा संस्थानों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, और कौशल विकास में IKS को प्रभावी रूप से शामिल किया जा सकता है।
वैश्विक स्तर पर योग, आयुर्वेद, और संस्कृति की मान्यता और स्वीकृति के माध्यम से भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा ने अपनी प्रासंगिकता सिद्ध की है। पुस्तक का निष्कर्ष यही है कि भारतीय ज्ञान परंपरा से प्रेरणा लेकर आधुनिक शिक्षा प्रणाली को अधिक मानवीय और समावेशी बनाया जा सकता है। UNESCO, WHO, और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी भारतीय चिकित्सा प्रणाली और भारतीय ज्ञान की वैज्ञानिकता को अनेक संदर्भों में स्वीकार किया है।